राजनीति

विधानसभा चुनाव 2022 : चुनाव आयोग ने रखी है यह शर्तें, जानिए इन शर्तों से किसे होगा फायदा?

डेस्क: जिसे दिन चुनाव आयोग में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तर प्रदेश पंजाब गोवा उत्तराखंड एवं मणिपुर में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी। उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा सीटों पर 7 चरणों में मतदान होने हैं। यहां 10 फरवरी से मतदान शुरू होकर 7 मार्च तक 7 चरणों में मतदान होगा। जबकि गोवा में केवल एक ही चरण का मतदान होगा वही मणिपुर में दो चरणों में मतदान कराया जाएगा।

कहां कितने सीटों पर होगा चुनाव?

बात करें विधानसभा सीटों की तो इन पांचों राज्यों में सबसे प्रमुख उत्तर प्रदेश है क्योंकि यहां कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। वहीं पंजाब में 117 और उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटें हैं। बात करें मणिपुर की तो वहां 60 और गोवा में कुल 40 विधानसभा सीटों पर मतदान होंगे। ज्ञात हो कि इन 5 राज्यों में से 4 राज्यों में पहले ही भाजपा की सरकार है केवल पंजाब में ही कांग्रेस का शासन है।

चुनाव आयोग ने रखी है यह शर्तें

वर्तमान स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने किसी भी रोड शो, पदयात्रा, साइकिल या बाइक रैलियों और जुलूसों की अनुमति नहीं दी है। हालांकि आयोग ने यह स्पष्ट किया कि बाद में स्थिति की समीक्षा की जाएगी और नए निर्देश जारी किए जाएंगे। इन नियमों के अलावा चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों के लिए अनिवार्य किया है कि किसी भी लंबित अपराधिक मामलों वाले व्यक्ति को अपना उम्मीदवार घोषित करने पर पार्टी को यह जानकारी जनता को देनी होगी कि इस व्यक्ति को उम्मीदवार क्यों चुना गया है?

इन शर्तों से किसे होगा फायदा?

चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के साथ ही चुनाव होने वाले पांच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुका है। चुनाव आयोग के इस तरह के सड़कों पर रखने के बाद अब सभी पार्टियां असमंजस में है कि वह चुनाव प्रचार कैसे करें? ऐसे में सभी के पास एक ही रास्ता बचता है कीवर्ड डिजिटल मीडिया का प्रयोग कर अपने प्रचार का काम करें इस हिसाब से देखा जाए तो भाजपा का पलड़ा भारी दिखता है क्योंकि वह काफी पहले ही डिजिटल मीडिया को अपना चुकी है। वही बाकी की पार्टियां अब धीरे-धीरे इस ओर अपना रुख कर रही है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश सहित अन्य चार राज्यों में चुनाव कराने के लिए वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ शर्तें रखी हैं। जिसके बाद सभी पार्टियों के पास डिजिटल प्रचार के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता है। ऐसे में देखना है कि चुनाव आयोग के इन शर्तों का लाभ अच्छी तरह से कौन उठा सकता है?

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