पश्चिम बंगाल

हाईकोर्ट में बंगाल सरकार ने NHRC की रिपोर्ट पर लगाए आरोप, कहा- आयोग से ऐसी उम्मीद नहीं थी

 

डेस्क: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद कई जगहों पर हिंसा का माहौल देखने को मिला। चुनाव के बाद हुई हिंसा का भाजपा द्वारा काफी विरोध किया गया। इसके लिए कई बार प्रदर्शन भी किए गए। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को बंगाल भेजा गया।

बंगाल में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का काम चुनाव के बाद में हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट तैयार करना तथा उसे कोलकाता हाई कोर्ट को सौंपना था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी ठीक है ऐसा ही किया। आयोग ने हिंसा की एक रिपोर्ट तैयार की और उसे कोलकाता हाई कोर्ट को सौंपा।

रिपोर्ट में है कई कमियां: हाईकोर्ट

रिपोर्ट सौंपने के बाद कोलकाता हाईकोर्ट में 22 जुलाई को सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कई कमियां है। उनके अनुसार रिपोर्ट में चुनाव से पहले हुए हिंसा की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है।

उनका कहना है कि आयोग को चुनाव के बाद हुए हिंसा की रिपोर्ट तैयार करने के लिए बंगाल भेजा गया था। जबकि रिपोर्ट में चुनाव के पहले हुए हिंसा का भी जिक्र है। सिंघवी ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी संस्था से हमें ऐसी उम्मीद नहीं थी। कोलकाता हाईकोर्ट के 5 जजों की पीठ ने 28 जुलाई तक इस विषय में हलफनामा पेश करने को कहा है।

आयोग ने बंगाल सरकार की कड़ी आलोचना की

चुनावी हिंसा का रिपोर्ट तैयार करने के लिए बंगाल आए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बंगाल सरकार की कड़ी आलोचना की है। रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले ऐसा चुनावी हिंसा से राज्य में नहीं देखा गया। बता दें कि राज्य सरकार की चुनाव के बाद हुए हिंसा के मामलों की जिला स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।

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