पश्चिम बंगाल

श्रमिकों का अव्यवस्थित बंगाल वापसी मर्माहत करनेवाली : आरके पाठक

आरके पाठक को पिछले दिनों भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के उत्तर 24 परगना जिले के 'संगठन मंत्री' के तौर पर नियुक्त किया गया

डेस्क: कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन की मार सबसे अधिक मजदूर-श्रमिकों को झेलनी पड़ी है. अपने घर परिवार से दूर तंगहाली में इन मजदूरों ने अपना समय कटाया. हालांकि श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन चला कर केंद्र सरकार ने ऐसे मजदूरों को घर भेजने की सराहनीय पहल की, लेकिन ऐसे में पश्चिम बंगाल सरकार का रवेया अपने ही राज्य के श्रमिकों के प्रति बहुत ही निर्दयी था. दूसरे राज्यों में कार्यरत मजदूरों की अव्यवस्थित रूप से बंगाल वापसी की घटनाएं मर्माहत कर देनेवाली थीं. ये घटनाएं राज्य सरकार के अपरिपक्व व अदूरदर्शी नीति का परिणाम था. यह बातें भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के उत्तर 24 परगना जिले के नवनियुक्त ‘संगठन मंत्री’ रोहित कुमार पाठक उर्फ़ आर के पाठक ने कहीं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के युवा कार्यकर्ता आरके पाठक को पिछले दिनों भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के उत्तर 24 परगना जिले के ‘संगठन मंत्री’ के तौर पर नियुक्त किया गया था. पदभार संभालने के बाद उन्होंने मजदूरों के शोषण को खत्म कर उनके पोषण और संरक्षण का संकल्प लिया.

श्री पाठक ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार की निंदा करते हुए कहा, मज़दूरों के मान सम्मान की परवाह किये बिना ही राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बयान दिया, जिससे ऐसा लगता है जैसे उनके अनुसार मजदूर ही अप्रत्यक्ष रूप से ‘कोरोना’ फैलाने का माध्यम हैं. अब प्रश्न यह है कि राज्य सरकार राज्य के परीश्रमी मजदूरों को कब तक प्राप्य वेतन और सम्मान से वंचित रखेगी.
उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि मजदूरों को लेकर राजनीति करने पर से अच्छा है कि उनके हित में श्रम नीति को उन्नत बनाने पर ध्यान दें. वातानुकूल कमरों में बैठ कर असहाय मजदूरों पर शोषण की राजनीति करनेवाली राज्य सरकार को मेरी सलाह है की शोषण नीति छोड़ कर श्रमनीति पर काम करें. मजदूरों को उनके काम का पूरा दाम मिले.

उन्होंने कहा कि उत्तर 24 परगना जिले में सैकड़ों ऐसे मजदूर हैं, जिन्हे वेतन नहीं मिला है. बेबसी के इस माहौल में प्रतिवाद करने का सही रास्ता नज़र न आने पर परेशान होकर जो मजदूर रास्ता भटक गये तथा छल कपट के शिकार हो गये, उनका भारतीय मजदूर संघ में स्वागत है.

अब समय आ गया है, अपने प्राप्य सम्मान, गौरव और वेतन के लिए सारे मजदूर राष्ट्रवाद की प्रेरना से भरी ‘भारतीय मजदूर संघ’ के संग्रामी सैनीक बनकर अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाये.

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