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जानिए कैसे देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में आप भी दे सकते हैं योगदान

 

डेस्क: पिछले कुछ समय से भारत का जीडीपी काफी पिछड़ा हुआ था लेकिन अब भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 20.1% हो गया है। इसकी जानकारी मिलते ही कई लोगों में खुशी देखने को मिल रही है तो वहीं कई लोग अभी भी इसमें कमियां निकाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्या कारण है कि भारत की जीडीपी में अचानक इतनी वृद्धि हुई?

क्या है जीडीपी?

भारत के जीडीपी में अचानक इतना उछाल आने के कारण को जानने से पहले यह जानना आवश्यक है कि जीडीपी होता क्या है? दरअसल, जीडीपी 1 साल में एक देश द्वारा प्रोड्यूस किए गए सारे वस्तुओं और सेवाओं की कुल मूल्य का योग होता है। किसी भी देश के जीडीपी की गणना करने के लिए 3 तरीके होते हैं। इससे पहला है आय दृष्टिकोण, दूसरा है मूल्यवर्धन दृष्टिकोण और तीसरा है व्यय दृष्टिकोण।

जीडीपी कैलकुलेट करने का फार्मूला

आप किसी भी तरीके से देश की जीडीपी कैलकुलेट करें लेकिन परिणाम आपको एक ही मिलेंगे। एक साधारण फार्मूले के प्रयोग से भी आसानी से किसी देश का जीडीपी कैलकुलेट किया जा सकता है। वह फॉर्मूला है C+I+G+(कुल निर्यात)। इसमें C का अर्थ है कि लोग अपनी जरूरतों के लिए कितना व्यय करते हैं। I का अर्थ है कुल निजी निवेश अर्थात देश में कुल कितनी इन्वेस्टमेंट हो रही है। G का अर्थ है कि गवर्नमेंट अपने अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में कितना खर्चा कर रही है या कितना रोजगार पैदा कर रही है।

1990 के बाद पहली बार 20% से ऊपर उठा जीडीपी

बताया जा रहा है कि 1990 के बाद से जब से हर 3 महीने में जीडीपी कैलकुलेट होना शुरू हुआ है, तब से पहली बार यह आंकड़ा 20% से ऊपर उठा है। लेकिन क्या इसका अर्थ यह है कि भारत के अर्थव्यवस्था में भी सुधार आ चुकी है?

पिछले वर्ष -23.9% था जीडीपी

महामारी के इस पूरी दुनिया में खेलने के बाद पिछले वर्ष लगभग इसी समय भारत का जीडीपी -23.9% था लेकिन ठीक 1 साल बाद देश की जीडीपी में 20.1% वृद्धि हुई है। लेकिन केवल जीडीपी में वृद्धि होने से अर्थव्यवस्था में भी सुधार हो, यह जरूरी नहीं है। देश के इस वर्ष के जीडीपी को 1 साल पहले इसी समय की जीडीपी के साथ तुलना कर ग्रोथ रेट तय किया जाता है। ऐसा कहा जा सकता है कि पिछले साल जीडीपी के नेगेटिव होने का फायदा इस साल देखने को मिला है।

फिर हो सकता है जीडीपी को खतरा?

कोरोनावायरस के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अब धीरे-धीरे यह परेशानियां दूर हो रही है। फिर भी यदि तीसरा लहर का प्रकोप दिखा प्रिया पड़ा फिर से एक बार निगेटिव में जा सकता है। ऐसे में देश की ग्रोथ रेट को बनाए रखने में हमारा भी महत्वपूर्ण योगदान है।

जीडीपी बढ़ाने में कैसे दे सकते हैं योगदान

यदि एक बार फिर लॉकडाउन लगता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर एक बार और बुरा असर देखने को मिलेगा। इसलिए आवश्यक है कि हम समझदारी से काम लें और महामारी की रोकथाम के लिए आवश्यक सभी प्रोटोकॉल्स का पालन करें। एक मात्र यही उपाय है जिससे देश का ग्रोथ रेट बरकरार रह सकता है। ऐसा करके ही देश की अर्थव्यवस्था को एक बार और मजबूत किया जा सकता है।

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