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शर्मनाक: पुलवामा शहीद का परिवार धरने पर, मूर्ति बनी पर अनावरण नहीं हुआ, घोषणा हुई पर मुआवजा नहीं मिला

 

डेस्क: जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में सबसे घातक पुलवामा आतंकी हमला है। 14 फरवरी 2019 के दिन सीआरपीएफ की बस को जैश के आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक से भरे अपने वाहन से टक्कर मार दी थी। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवान शहीद हो गए थे।

इसके ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश की सेना ने इस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया। इस हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके दिल में भी वैसी ही आग है जैसे देश की हर जनता के दिल में थी।

शहीद हुए जवानों के लिए सरकार द्वारा मुआवजे का भी ऐलान किया गया था। 3 जवानों की मूर्तियां भी उनके गांव में बनवाई गई थी। लेकिन इस घटना के लगभग 2 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक एक शहीद जवान को उसका हक नहीं मिला।

मुख्यमंत्री राहत कोष में भेज दिया गया मुआवजा

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवान कौशल किशोर रावत का परिवार गुरुवार से ही गांव में उनकी प्रतिमा के पास धरने पर बैठा है। शहीद कौशल किशोर की पत्नी का प्रशासन पर आरोप है कि उनके पति के शहादत पर मिलने वाला मुआवजा उन्हें ना देकर मुख्यमंत्री राहत कोष में भेज दिया गया।

उन्होंने शासन और प्रशासन पर शहादत की अमानत में खयानत के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 2 साल से वह अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर जिला अधिकारी कार्यालय तक के चक्कर काट रही है। लेकिन न तो उनकी मूर्ति का अनावरण हुआ और न ही मुआवजे की राशि दी गई।

 

प्रशासन ने पूरे नहीं किये वादे

शहीद कौशल रावत के परिवार वालों का कहना है सरकार ने शहादत के समय जो कुछ भी वादे किए थे, वह अभी तक पूरे नहीं किए। शिक्षकों ने परिवार की आर्थिक सहायता के लिए लगभग 67 क्लॉक रुपए एकत्र किए लेकिन इस राशि को मुख्यमंत्री राहत कोष में भेज दिया गया।

इसके बाद शहीद की पत्नी ने जिला विकास अधिकारी के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा कि विकास भवन से 3 लाख 50 हजार रुपए इकट्ठा हुए थे जिनका उपयोग जिला विकास अधिकारी ने निजी खर्च के लिए किया।

इसके अलावा परिवार वालों का आरोप है शहीद की मूर्ति का अनावरण भी अभी तक नहीं किया गया है। परिवार वालों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरी नहीं की जाएगी, तब तक वह धरना जारी रखेंगे। तब भी अगर प्रशासन ने उनकी मांगे नहीं मानी, तो वह आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।

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