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कोरोना काल में बिना डॉक्टर की सलाह के गलती से भी ना करें ये काम

डेस्क: देश में अभी कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। चारों तरफ ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए अफरा-तफरी मची हुई है। दवाइयों की कालाबाजारी तक हो रही है।

कई राज्यों में लॉकडाउन भी लग चुके हैं। इस बीच मौसम में बदलाव के चलते भी कई लोगों में मामूली सर्दी खांसी की शिकायत आ रही है।

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर नवजोत सिंह दहिया का कहना है कि इस महामारी से लोग बहुत ज्यादा डरे हुए हैं। इसी वजह से सामान्य लक्षणों के दिखते ही लोग परेशान हो जाते हैं।

कई लोग तो बिना मतलब के आरटी पीसीआर टेस्ट तक करवा रहे हैं। कई तो 5 से 7 हजार रुपए खर्च कर सिटी स्कैन तक भी करवा रहे हैं।

कुछ मामलों में स्थिति को सुधारने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी देखा जा रहा है। इसे लेकर दिल्ली एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने चिंता जताई है।

बेवजह न करवाएं सिटी स्कैन

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कोरोनावायरस लक्षण महसूस होने पर लोग खुद ही अपना उपचार अपने मुताबिक करने लग रहे हैं। आंकड़ों की माने तो सीटी स्कैन कराने वाले लोगों की संख्या पहले से दोगुनी हो गई है।

डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में सर्दी खांसी जैसे सामान्य लक्षण है तो उन्हें सिटी स्कैन नहीं करवानी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार सिटी स्कैन केवल उन्हें ही करवानी चाहिए जो अस्पताल में भर्ती है या फिर होम आइसोलेशन में है और जिनकी हालत में कोई सुधार नहीं आ रही है। बिना वजह सिटी स्कैन करवाना भी शरीर पर बुरा प्रभाव छोड़ता है।

बिना सलाह न लें एंटीबायोटिक्स

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संकट के इस दौर में खुद में सर्दी खांसी के लक्षणों को देख कई लोग डर जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह न लेकर कुछ लोग खुद ही एंटीबायोटिक व पेरासिटामोल की गोलियां लेने लगते हैं जो कि बिल्कुल गलत है।

डॉक्टरों की सलाह माने तो कभी भी ज्यादा एंटीबायोटिक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

न करें स्टेरॉयड का प्रयोग

डॉ रणदीप ने अलग-अलग तरह के स्टेरॉयड का भी इस्तेमाल ना करने की सलाह दी है। उनके अनुसार इन स्टेरॉयड के उपयोग से ऑक्सीजन लेवल पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। स्थिति सुधरने की बजाय और भी बिगड़ सकती है।

इंटरनेट पर लक्षणों को न खोजें

इसी के साथ उन्होंने कहा कि अपने लक्षणों को कभी इंटरनेट पर सर्च ना करें। क्योंकि समान लक्षणों वाले ही कई और भी बीमारियां हो सकते हैं। ऐसे में मानसिक तनाव के अलावा कुछ और हाथ नहीं लगती।

 

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