अंतरराष्ट्रीय

कोरोना पर WHO ने फिर बढ़ाई चिंता, बताई ये सच्चाई

डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बार फिर साफ किया है कि कोरोना संक्रमण से जल्द छुटकारा मिलने वाला नहीं है. संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहोम घेब्येयियस ने कहा कि ऐसी महामारी सदियों में एक बार आती है और इसका प्रभाव आने वाले दशकों तक महसूस किया जाएगा.

इमरजेंसी कमेटी की बैठक में डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि कई देश जो मानते थे कि उन्होंने कोरोना को पीछे छोड़ दिया है, अब वे नए मामलों से जूझ रहे हैं. कुछ ऐसे भी देश है जो शुरुआत में वायरस से कम प्रभावित हुए थे. लेकिन अब वहां हालात चिंताजनक बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि वैक्सीन को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है, लेकिन अब हमें वायरस के साथ जीना सीखना होगा और जो कुछ भी हमारे पास है उससे इसका मुकाबला करना होगा.

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फिलहाल नहीं दिख रहे वायरस से मुक्ति के आसार

घेब्येयियस ने कहा कि कई वैज्ञानिक प्रश्नों को हल कर लिया गया है और कई के जवाब दिए जा रहे हैं. सीरोलॉजी अध्ययन के शुरुआती परिणाम एक सुसंगत तस्वीर पेश कर रहे हैं. दुनिया के अधिकांश लोग इस वायरस के प्रति संवेदनशील हैं. इस तरह की महामारी सदियों में एक बार होती है और इसका प्रभाव हमें आने वाले दशकों तक महसूस होगा. कोरोना को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल या फिर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित करने के बाद ये विश्व स्वास्थ्य संगठन की चौथी बैठक थी.

खौफ में जिंदगी, पटरी से उतरी दुनिया अर्थव्यस्था

गौरतलब है कि चीन के वुहान से निकले इस वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले रखा है. स्वास्थ्य संकट के साथ ही अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्थाएं पटरी से उतर गई हैं. यूरोप में सकल घरेलू उत्पाद में 12.1 फीसद और यूनियन ब्लॉक में 11.9 फीसद की गिरावट देखी गई है. कोरोना से अब तक 17 मिलियन से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, जबकि 675,000 के आसपास लोगों की मौत हुई है.

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