झारखंड

सबसे स्वच्छ सीमेंट उत्पादक कंपनी है डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड: सुनील गुप्ता

बिहार में भी वर्ष 2022 तक ग्रीन फील्ड ग्राइंडिंग यूनिट चालू की जाएगी, जिसके लिए अधिग्रहण का कार्य चल रहा है।

बोकारो (झारखंड): प्लास्टिक आज पूरे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनी है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्लास्टिक को देश के लिए एक विकट समस्या बताते हुए प्लास्टिक मुक्ति का आह्वान हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर किया था। इस दिशा में सरकारी स्तर पर लगातार देशभर में कवायदें भी तेज तेज हो चुकी हैं। इसी कड़ी में बोकारो, झारखंड सहित पूरे भारतवर्ष को कचरामुक्त बनाने को लेकर डालमिया भारत ग्रुप ने बड़ी राहत वाली बात की है। कंपनी के पूर्वी क्षेत्र के अधिशासी निदेशक (उत्पादन) सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि देशभर में डालमिया प्लांट के स्तर पर प्रतिदिन 2000 टन तक प्लास्टिक कंज्यूम कर उसका ईंधन में इस्तेमाल करने की क्षमता है।

सरकार अगर चाहे तो अनुपयुक्त प्लास्टिक को उनकी कम्पनी के सहयोग से निस्तारित करा सकती है। कंपनी इसके लिए तत्पर है। सोमवार को यहां एक संवाददाता-सम्मेलन में गुप्ता ने कहा कि डालमिया सीमेंट की राजगंजपुर (ओड़िशा) इकाई में अभी भी 25 से 45 टन प्रतिदिन प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। सात-आठ महीने में 200 टन प्लास्टिक उपयोग करने में हम सक्षम हो जाएंगे। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु सहित देशभर की 11 किल्न (ताप भट्ठी) में 150 टन प्रतिदिन के हिसाब से रोजाना दो हजार से ढाई हजार टन प्लास्टिक कंज्यूम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक पूरे देश के लिए एक गंभीर समस्या है। सरकार इसे लेकर व्यवस्था भी कर रही है। श्री गुप्ता ने बताया कि कंपनी प्लास्टिक-मुक्त भारत अभियान में इसलिए भी खास तौर से हाथ बंटा रही है, क्योंकि कंपनी के समूह सीईओ महेंद्र सिंघी यूनेस्को के सदस्य भी हैं और उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ इसकी जिम्मेदारी ली है।

गुप्ता ने कहा- वर्ष 2040 तक हम कार्बन निगेटिव होंगे। अगले दो-तीन साल में इस दिशा में व्यापक टीम के साथ खाका तैयार कर लेंगे। उन्होंने दावा कि पूरे विश्व में उनकी कंपनी सबसे स्वच्छ सीमेंट उत्पादक कंपनी के रूप में जानी जाती है। वर्तमान में प्रति टन 360 किलोग्राम कार्बन का उत्सर्जन होता है। वर्ष 2030 में रिन्यूएबल एनर्जी से काम करने लगेंगे। बिहार में भी वर्ष 2022 तक ग्रीन फील्ड ग्राइंडिंग यूनिट चालू की जाएगी, जिसके लिए अधिग्रहण का कार्य चल रहा है।

डालमिया भारत ग्रुप की आगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए ईडी (मैन्युफैक्चरिंग) सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में पूर्वी व्यवसाय क्षमता लगभग 10 मिलियन टन है। आगामी वित्तीय वर्ष तक निकट भविष्य में 16 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है। इस पूर्वी क्षेत्र में ओडिशा के राजगंज व कपिलास, झारखंड के बोकारो, पश्चिम बंगाल के मिदनापुर, कपिलास और बिहार में इंटीग्रेटेड प्लांट शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में बिहार में एक जर्जर पर एक प्लांट को अधिग्रहित कर उसे पुनः उपयोग में लाया गया है। गुप्ता ने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष तक 3000 करोड़ रुपये के निवेश से बोकारो की दो ग्राइंडिंग यूनिट के साथ-साथ राजगंज पूर्व स्थिति इंटीग्रेटेड प्लांट में विस्तारीकरण की योजना है। आने वर्ष 2022 तक 50 मिलियन टन तक उत्पादन क्षमता बढ़ाए जाने की योजना पर काम चल रहा है।

डालमिया भारत की ओर से बोकारो स्थित सीमेंट फैक्ट्री के आसपास बसे दर्जनों गांवों में निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत मूलभूत सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। कंपनी के एडी सुनील कुमार गुप्ता, स्थानीय इकाई प्रमुख मुकेश गर्ग एवं सीएसआर प्रमुख (प्रबंधक) उमेश प्रसाद ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्ष 2015-16 से ही डालमिया भारत यहां अपने संयंत्र के इर्द-गिर्द बसे क्षेत्र के विकास में प्रयासरत है। ग्रामीणों के लिए पानी, तालाब, पौधारोपण, शौचालय-निर्माण, महिला-स्वावलंबन के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं तथा सरकारी स्कूलों के बच्चों को मोबाइल कंप्यूटर लैब के जरिए तकनीकी रूप से भी हुनरमंद बनाने के काम चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने मुनाफा की दो प्रतिशत राशि से कंपनी निगमित सामाजिक दायित्वों का पूरा पालन करती है। लगभग दो करोड रुपए के खर्च से डालमिया भारत ने बोकारो एवं आसपास के इलाके में क्षेत्रीय एवं सामुदायिक विकास के कार्य किए हैं। संवादाता सम्मेलन मैं सीएसआर के वरीय अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा, मानव संसाधन विभाग की अधिकारी श्वेता कुमारी सहित दीपक पात्रा, सोनू आदि उपस्थित थे।

अरुण पाठक, बोकारो

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