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चरस-गुटका गैंग के बच्चों से अलग है आर माधवन का बेटा, मां-बाप और देश का नाम किया रौशन, बोले- मेरा लक्ष्य ओलंपिक

 

डेस्क: हाल ही में अभिनेता-सह-फिल्म निर्माता आर माधवन के बेटे वेदांत माधवन ने कोपेनहेगन में डेनिश ओपन में पुरुषों की 800 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी प्रतियोगिता में एक स्वर्ण पदक जीता। पदक जितने के बाद वह तुरंत अपने कमरे में पहुंचे और अपने माता-पिता के साथ वीडियो कॉल पर बात कर उन्हें यह खुशखबरी दी। वेदांत के पिता आर माधवन यह खबर पाकर उत्साहित थे, लेकिन अपने बेटे के गले में स्वर्ण पदक देखकर अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सके।

अभी लंबा सफर तय करना है

16 वर्षीय वेदांत ने स्वर्ण पदक जीतने के लिए 8:17:28 सेकंड का समय लिया, जो उनका अब तक का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। उन्होंने पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए स्थानीय बालक अलेक्जेंडर एल ब्योर्न को 0.10 सेकंड से हरा दिया। वेदांत के स्वर्ण पदक की सभी ने सराहना की और लंबे समय में भारतीय तैराकी के लिए यह एक अच्छा संकेत है। हालांकि वेदांत और भारतीय तैराकी दोनों को अभी लंबा सफर तय करना है।

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डेनिश ओपन में शानदार प्रदर्शन के बाद, वेदांत ने अब पेरिस 2024 पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं और वह तैराकी में पहली बार भारत को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने का सपना देख रहे हैं।

सभी को कहा धन्यवाद

स्वर्ण जीतने के बाद वेदांत ने कहा, “मैंने इसके लिए बहुत समय और प्रयास लगाया। मैं इस उपलब्धि को हासिल करके वाकई बहुत खुश हूं। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया। चाहे वह मेरे कोच हों, मेरी माँ, मेरे पिताजी, मेरे आहार विशेषज्ञ, सभी ने पर्दे के पीछे रहकर मेरी बहुत मदद की है। उनके बिना यह संभव नहीं होता। मैं स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया को धन्यवाद देना चाहता हूं। वे ही हैं जिन्होंने मुझे वहां भेजा है।”

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मेरा मुख्य लक्ष्य ओलंपिक है: वेदांत

“मेरा मुख्य लक्ष्य ओलंपिक है।” ऐसा कहते हुए उन्होंने बताया कि जूनियर नेशनल में उनके प्रदर्शन के आधार पर एशियाई खेलों के लिए उनका चयन होगा। जूनियर नेशनल में उनका प्रदर्शन एशियाई खेलों और FINA जूनियर्स के लिए उनके भाग्य का फैसला करेगा। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका मुख्य लक्ष्य 2024 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।

भारत की वेदांत से उम्मीदें

ज्ञात हो कि तैराकी एक ऐसा खेल है जिसमें अब तक कोई भी भारतीय तैराक प्रभुत्व स्थापित करने में सफल नहीं हुए हैं। ऐसे में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। वेदांत जैसे प्रतिभाशाली तैराक समग्र रूप से भारतीय तैराकी के बेहतर, उज्जवल भविष्य की आशा हैं।

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