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हवा से भी फैल सकता है कोरोना, WHO ने भी किया स्वीकार, अब इतने मीटर की दूरी है जरूरी

 

डेस्क: 1 साल से ऊपर हो गए देश में कोरोनावायरस का पहला केस मिले हुए। पिछले साल कई महीनों का लॉकडाउन भी रहा। फिर भी कमने के बजाए यह महामारी बढ़ती ही चली गई।

सरकार द्वारा कई तरह के गाइडलाइन जारी किए गए। सार्वजनिक जगहों का लगातार सैनिटाइजेशन किया गया। वर्ष फरवरी के अंत तक ऐसा लग रहा था कि हमने कोरोना के खिलाफ जीत हासिल कर ली।

लेकिन अप्रैल का महीना शुरू होते होते पहले से भी अधिक मामले सामने आने लगे। दिन प्रतिदिन कोरोना मामलों के रिकॉर्ड टूटने लगे।

अब डब्ल्यूएचओ द्वारा रिपोर्ट पेश की गई जिसमें यह आशंका जताया गया कि कोरोनावायरस हवा के माध्यम से भी फैल सकता है।

करीब 1 साल से डब्ल्यूएचओ असमंजस में था ऐसे किसी भी दावे को खारिज करता रहा। डब्ल्यूएचओ की तरफ से हवा से कोरोना फैलने के तरह के सबूत का नहीं होने का हवाला दिया जाता रहा।

अभी तक ऐसे दावे किए जा रहे थे कि यदि हम सोशल डिस्टेंसिंग का सही से पालन करें तो साक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है। लेकिन अब दावा किया जा रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग के लिए केवल 2 मीटर की दूरी काफी नहीं है।

अमेरिकन इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिक्स के मुताबिक कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने के लिए खांसने या खींचने वाले शख्स से मात्र 2 मीटर की दूरी काफी नहीं है।

एक शोध के द्वारा पता चला है कि मात्र 4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवा के साथ भी कोरोनावायरस लगभग 6 मीटर तक जा सकता है।

फिजिक्स ऑफ फ्लूइड जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि वायु की गति शून्य हो तम सीखने पर कोरोनावायरस 2 मीटर तक भी नहीं पहुंच सकता। लेकिन यदि वायु की गति अधिक हो तो यह है अच्छी खासी दूरी तय कर सकता है।

गौरतलब है कि पहले जारी किए गए गाइडलाइंस में कम से कम 2 मीटर की दूरी रखने की बात कही गई थी। लेकिन अब इस दूरी को वायरस से बचने के लिए कम बताया जा रहा है।

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