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कोचिंग के लिए नहीं थे पैसे, इंटरनेट से पढ़ाई कर ऐसे बना IRS, फिर कड़ी मेहनत कर बना IAS अधिकारी

 

डेस्क: जहां चाह, वहां राह। यह कहावत सिविल सेवा के उम्मीदवारों के जीवन में बिल्कुल फिट बैठती है। इस कहावत को सही साबित कर दिखाया है आईएएस अंशुमान राज ने। देश में सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा में सफल होने के लिए उम्मीदवारों को दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। एक समय था जब वह मिट्टी के तेल के दीपक के नीचे पढाई करते थे, लेकिन अब वह एक आईएएस अधिकारी बन चुके हैं।

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अंशुमान राज का प्रारंभिक जीवन

अंशुमन राज का जन्म बिहार के बक्सर के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता एक छोटे व्यवसायी थे, जबकि उनकी माँ एक गृहिणी थीं। अंशुमान जब छोटे थे तो समझ गए थे कि किसी की आर्थिक स्थिति सफलता की राह में रोड़ा नहीं बननी चाहिए। उनके गांव में दिन में 18-20 घंटे बिजली न होने के कारण वह 10वीं कक्षा तक केरोसिन के दीये की रोशनी में पढ़ते थे।

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उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई बिहार के जवाहर नवोदय विद्यालय से पूरी की। अंशुमन ने कहा कि एक सरकारी स्कूल से उनकी स्कूली शिक्षा ने यूपीएससी सीएसई की तैयारी में उत्प्रेरक का काम किया।

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कोलकाता से किया मरीन इंजीनियरिंग

अंशुमान ने एक सरकारी संस्थान से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कोलकाता के मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में अध्ययन किया और 4 साल तक हांगकांग की एक कंपनी में मरीन इंजीनियर के रूप में काम किया।

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इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। उनकी राय में यूपीएससी की तयारी के लिए आज केवल एक इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता है, जिसके माध्यम से कोई भी ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर सकता है। आज के समय में IAS बनने के लिए किसी को बड़े शहरों में जाकर कोचिंग लेने की जरूरत नहीं है।

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नहीं थे कोचिंग के पैसे

अंशुमान खुद गांव की पृष्ठभूमि से थे और उनके पास कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने के लिए पैसे नहीं थे। अंशुमान कहते हैं “जो लोग कोचिंग में शामिल हो सकते हैं उन्हें थोड़ा फायदा होता है। वे जानते हैं कि उन्हें क्या पढ़ना है और कहां से। लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि अगर कोई महंगी कोचिंग में शामिल नहीं होता है, तो वह सीएसई में असफल हो जाएगा।”

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अंशुमान राज की यूपीएससी रणनीति

अंशुमन ने किसी कोचिंग में दाखिला नहीं लिया और सेल्फ स्टडी के भरोसे अपने चौथे प्रयास में सफल हुए। अंशुमन राज की राय में तैयारी शुरू करने से पहले सही वैकल्पिक विषय का चुनाव करना जरूरी है। वह उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के अनुसार वैकल्पिक विषय का चयन करने के लिए कहते हैं।

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सही माध्यम का चुनाव आवश्यक

उनके अनुसार परीक्षा के लिए सही माध्यम चुनना भी आवश्यक है। उम्मीदवारों को इस धारणा से ऊपर उठना चाहिए कि अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवार परीक्षा में अच्छा स्कोर करते हैं। हिंदी माध्यम के उम्मीदवार और क्षेत्रीय माध्यम के उम्मीदवार भी परीक्षा पास कर सकते हैं।

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अंशुमन अपने गांव में रहने के दौरान रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई करता था। उसने बताया कि अपने दूसरे, तीसरे और अंतिम प्रयास के दौरान वह अपने गांव में ही था और वहीं से पढ़ाई करता था।

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नोट्स बनाना जरुरी

अंशुमान ने अपने दूसरे प्रयास में नोट्स तैयार नहीं किए। उसे जल्द ही एहसास हो गया कि यह उसकी गलती थी। उनका कहना है कि उम्मीदवारों को नोट्स तैयार करने चाहिए। अगर उम्मीदवार अपने नोट्स तैयार नहीं कर सकते हैं तो वे दूसरे टॉपर्स के नोट्स खरीद भी सकते हैं। लेकिन नोट्स से पढ़ना आवश्यक है।

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यूपीएससी की तैयारी के दौरान निरंतरता बनाए रखना अंशुमन की राय में सबसे महत्वपूर्ण है। उनका यह भी कहना है कि यूपीएससी की परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, बल्कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने का एक साधन है।

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मध्य प्रदेश सरकार में हैं सहायक कलेक्टर

अंशुमान राज अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी मेन्स पास करने में सफल रहे लेकिन इंटरव्यू के बाद उन्हें अच्छी रैंक नहीं मिली। वह 2019 में सहायक आयुक्त बने। हालांकि, उन्होंने उम्मीद नहीं खोई और अंतिम बार परिखा के लिए उपस्थित हुए और सफलता हासिल की। उन्होंने अपने अंतिम प्रयास में AIR 106 हासिल किया और वर्तमान में वह मध्य प्रदेश सरकार में सहायक कलेक्टर हैं।

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